1. गन्ने की अतिरिक्त पत्ती की कटाई
2. गन्ने की बंधाई
3. उपर्युक्त उर्वरक या स्प्रे का छिड़काव
1. गन्ने की अतिरिक्त पत्ती की कटाई
गन्ने में पत्ती का काटना काफी जरूरी होता है। इससे खेत में सफाई हो जाती है और गन्ने के निचले हिस्से की अतिरिक्त पत्ती हटने से खेत में कटी हुई पत्ती सड़कर खाद का काम करती है । साथ ही गन्ने में खाद डालने में , बंधाई करने में, या निरीक्षण में मदद मिलती है।
2. गन्ने की बंधाई
इसकी दो विधियां हैं, कुछ जगह किसान भाई पत्ती काटकर बंधाई करते हैं, कुछ जगह बिना पत्ती काटे ही गन्ने की बंधाई की जाती है। हालांकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पत्ती काटकर बंधाई करना ज्यादा प्रचलित है। ऐसे में लोगों का ये मानना है कि गन्ना छिलाई के वक्त सुखी पत्ती (पताई) कम निकलती है और छिलाई में आसानी होती है।
इसका मुख्य फायदा ये है कि गन्ना बंध जाने से ये गिरता नहीं है, जिससे चूहे कम लगने से पैदावार अच्छी मिलती है साथ ही पेड़ी भी अच्छी उगती है।
3. उपर्युक्त उर्वरक या स्प्रे का छिड़काव
इस समय पर (बरसात की सीजन में) गन्ने में कई तरह की बीमारियां या खरपतवार पैदा होते हैं और इनका उपयुक्त निदान तभी संभव है जब ऊपर की दोनों काम हों, अथवा कम से कम एक हुआ है। साफ खेत में आप सिर्फ urea डाल सकते हैं या इसमें iron , सल्फर डाल सकते हैं। इससे गन्ने की लंबाई में अच्छी वृद्धि देखने को मिलती है। या किसी तरह का फंगस या रोग पहचानकर उसकी दवाई लगाई जा सकती है। साथ ही खरपतवारों पर सही दवा डालकर गन्ने की पैदावार बढ़ाई जा सकती है अथवा रोगों पर नियंत्रण किया जा सकता है।
ऐसे में उपरोक्त दोनों विधियों का फायदा ही ये तीसरी विधि अपनाना है, जो कि अधिक उत्पादन की दृष्टि से आवश्यक है।
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